Episode Description
मेरी यह कविता "प्रतिशोध" पुलवामा के वीर बलिदानियों और भारतीय वायु सेना के पराक्रमी योद्धाओं को समर्पित है
चलो फिर याद करते हैं कहानी उन जवानों की।
बने आँसू के दरिया जो, लहू के उन निशानों की॥
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नमन चालीस वीरों को, यही संकल्प अपना है।
बचे कोई न आतंकी, यही हम सब का सपना है॥
The full Poem is available for your listening.
You can write to me on HindiPoemsByVivek@gmail.com
चलो फिर याद करते हैं कहानी उन जवानों की।
बने आँसू के दरिया जो, लहू के उन निशानों की॥
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नमन चालीस वीरों को, यही संकल्प अपना है।
बचे कोई न आतंकी, यही हम सब का सपना है॥
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